जिला प्रशासन ने अमेठी को कागजों में ओडीएफ घोषित कर थपथपाई अपनी पीठ, कागजों में ओडीएफ घोषित जिले के चन्डेरिया गांव में भ्रष्टाचार की कहानी

 

अमेठी जिले के सबसे पिछड़े व भ्रष्ट विकास खण्ड संग्रामपुर की कहानी

अमेठी से अशोक श्रीवास्तव की रिपोर्ट

 

 

 

 

भारत स्वच्छ मिशन की धज्जियां उड़ाता हुआ एक गांव अमेठी के संग्रामपुर विकास खण्ड के गांव चन्डेरिया का देखिये जहां ब्लॉक कर्मियों व ग्राम प्रधान के गठजोड़ से इस अभियान की खुलेआम धज्जियां जा रही है। ग्रामीणों के अनुसार ग्राम प्रधान व पंचायत सचिव ने अपने चहेते ठेकेदारों के माध्यम से शौचालय का निर्माण तो कराया लेकिन शौचालय में न तो अभी तक सीट लगी न ही छत पड़ी और न ही गड्ढा खुदा। हाँ ये जरूर किया है कि शौचालय के नाम पर कहीं एक दीवार खड़ी करवा दिया तो कहीं चारों दीवार खड़ी करवा कर छोड़ दिया। इसमें लाभार्थियों को लाभ तो नहीं मिल सका लेकिन प्रधान व पंचायत सचिव व सहायक विकास अधिकारी पंचायत को सरकारी धन खूब लाभ मिला।

शौचालय निर्माण में रुपये 12 हजार का लाभ सरकारी अनुदान के रूप में लाभार्थियों के खाते में दिए जाने के सरकारी आदेश को ब्लॉक कंर्मियों की मिलीभगत से ग्राम प्रधान ने न देकर मनमर्जी कर स्वयम के ठेकेदारों से घटिया निर्माण कर एक बड़े घोटाले को जन्म दे दिया। क्योंकि पंचायत कर्मी भी इसमें शामिल हैं इसलिये घोटाला करने में प्रधान को कोई दिक्कत नहीं हुई। आपको बताते चलें कि अगस्त 2018 में इसी ब्लॉक के करौंदी गांव में शिकायत के बाद तत्कालीन डीपीआरओ बनवारी सिंह ने ग्राम प्रधान व पंचायत सचिव के खिलाफ कड़ी कार्यवाही की थी लेकिन बाद में मामले को मैनेज करने में माहिर डीपीआरओ ने रफादफा कर दिया

गाँव के महफूज खान, लईक खाँ जमाल खाँ सुल्तान खाँ रियाज खाँ नियाज खाँ फूलमोहम्मद खाँ वारिस खाँ आदि ने बताया कि प्रधान और ठेकेदार मिलकर हमारा शौचालय बनवाया जिसमें न तो गड्ढा बनवाया और न ही सीट लगी न ही छत डाली गयी। जुड़ाई भी 15:1 के मसाले से व घटिया ईट से की गयी है। ग्रामीणों ने भ्रष्टाचार की जांच कराकर दोषियो के ऊपर कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है

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