भारत सरकार की महारत्ना कम्पनी “एन टी पी सी” को दीमक की तरह चिपक कर चाट रही है “यू पी एल”

*भारत सरकार की महारत्ना कम्पनी “एन टी पी सी” को दीमक की तरह चिपक कर चाट रही है “यू पी एल”-!*

*करोड़ो रूपये प्रतिवर्ष चुना लगाते हुए विश्व स्तरीय कम्पनी के शाख पर लगा रही है बट्टा-!*
देश की सबसे बडी बिजली कम्पनी एनटीपीसी जिसने अंतरराष्ट्रीय ख्याति स्तर की बड़ी बिजली कंपनियों मेंअपनी शाख कायम करने में सफलता प्राप्त कर देश और भारत सरकार का गौरव बढ़ाया
है।
जिस पर हर देशवासी को गर्व होता हैं।
परन्तु उसके शाख पर बट्टा लगा रही है एनटीपीसी में कार्यरत “यू पी एल” नामक एक प्राइवेट लिमिटेड कंपनी।
जिससे एन टी पी सी के भी उच्चाधिकारी वेखबर हैं।

*कौन है यू पी एल जो अन्य कम्पनियों से हट के एक अलग तरह की है कम्पनी!*

दशको पहले एन टी पी सी के ही सेवानिवृत अधिकारियों और कुछेक प्रोफेशनल मिल कर एक यू पी एल नामक कम्पनी, कम्पनी एक्ट में पंजीकृत कराई।जो दशको से एन टी पी सी में आउटसोर्सिंग सहित अन्य एनटीपीसी का कार्य उसकी सहयोगी कम्पनी और संविदाकार के रूप में करती चली आरही है।
परन्तु यह कम्पनी अन्य संविदा कम्पनियों व एजेंसियों से हटकर एक सहयोगी कम्पनी के रूप में भूमिका निभा रही है।
इस कम्पनी को एन टी पी सी के इस्टीमेटेट कास्ट के अतिरिक्त इसको एक निश्चित प्रतिशत लाभांश सर्विस देने का कमीशन देती है।
इतना ही नही आवासीय और चिकित्सकीय सुविधा भी एनटीपीसी द्वारा मुहैया कराया जाता है।
जबकि अन्य संविदा कम्पनियों और एजेंसियों को यह सुविधा उपलब्ध नही है।
यू पी एल भी एन टी पी सी से काम अर्जित कर, फिर वह भी निविदा आमंत्रित कर नियुन्तम दर वाले संविदा एजेंसियों को काम आवंटित कर काम कराती हैं।
जबकि कुछ काम एनटीपीसी भी सीधे निविदा आमंत्रित कर कराती है।
दोनो कामो पर पड़ने वाले खर्च में जमीन आसमान का अंतर होता है।
और अतिरिक्त व्यय भी एन टी पी सी को नही करना पड़ता है।इसीलिए एन टी पी सी में कार्यरत अन्य संविदा एजेंसियों से हट कर अलग है, जो करोड़ो रूपये प्रतिवर्ष एन टी पी सी को चुना लगा रही है और इस प्राइवेट कंपनी के भ्रष्ट तंत्र की कार्य संस्कृति से देश की अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त, महारत्ना कम्पनी के शाख पर बट्टा लगाते हुए उसके दामन में भी दाग लगा रही है।

*एन टी पी सी के सेवानिवृत्त अधिकारियों,कर्मचारियों व उनके भाई भतीजो की चारा गाह बन गयी हैं यू पी एल !*

इस कंपनी के गठन से लेकर आज तक पर गौर करे तो एन टी पी सी के सेवानिवृत्त अधिकारी ही इस कम्पनी के उच्च प्रवंधन के पद पर विराजमान होते रहते हैं और कम्पनी के नीचे के पदों पर भी अधिकांश इनके ही भाई भतीजे पदस्थ पाए जाते
हैं ।
इनकी कार्य संस्कृति से एन टी पी सी को भारी आर्थिक क्षति के साथ उसके उत्तम शाख पर बट्टा ही नही लग रहा है ,बल्कि एन टी पी सी प्रबंधन के नाम पर बिल पास कराने से लेकर तरह तरह के एन टी पी सी से पड़ने वाले काम के नाम पर गुलाबी कागज के टुकड़े दशको से बटोरे जाते हैं, जिससे वेदाग एन टी पी सी प्रवंधन को दागदार बना के खुद माला माल हो रहे हैं।
लेकिन वही एन टी पी सी प्रवंधन के वेदाग दामन पर दाग लगाने से बाज नही आरहे हैं। यू पी एल के तंत्र के इस खेल से एन टी पी सी प्रवंधन अनभिज्ञ है या आँख मुदे उनकी भी मिलीभगत है?
यह जांच का विषय है।
लेकिन एन टी पी सी के अन्तर्राष्ट्रीय शाख पर इनकी कार्यसंस्कृति पलीता तो लगा ही रही है।

*यू पी एल की नीति दो से तीन- तीन साल से भी अधिक समय तक फाइनल वील लटका के रखना है!*

एन टी पी सी में कार्यरत यह यू पी एल नामक कम्पनी तीन तीन साल तक ठीकेदारों का बील येन केन प्रकारेण कोई न कोई कमी निकाल के लटकाये रखती है।
उसके पीछे उस पैसे से अपने कम्पनी के काम और मुनाफे को बढ़ाना होता है, वही बैंक और बाहर से कर्ज लेकर बिजनस करने वाले ठीकेदार व्याज भरते भरते बर्बाद हो जाते है।
0इस कम्पनी ने नजाने कितने स्थानीय संविदाकारो को बर्बाद कर दिया है।
इस कम्पनी में वही ठीकेदार टीक पाते हैं जिन कम्पनियों में यू पी एल के किसी न किसी की हिस्सेदारी होती है।
इस तरह यह कम्पनी देश को यह कहा जाए कि नियमो, कानूनों, से संरक्षित होते हुए खुले आम लूट रही है तो अति श्योक्ति नही होगी?
इस कम्पनी के कारण देश को अरबो रुपये का नुकसान उठाना पड़ा है, इस खेल में बड़े बड़े अधिकारियो की संलिप्तता यदि जांच होजाये तो उजागर हो जाएगी और देश का यह महा घोटाला सावित हो सकता है।

*परियोजना के मुख्य महाप्रबंधक और क्षेत्रीय विधायक के निर्देशों का नही है इन्हें परवाह!*

यू पी एल नामक इस कम्पनी का प्रवन्ध तंत्र इस कदर वेख़ौफ़ है कि वे अपने परियोजना के मुख्य महाप्रबंधक और क्षेत्रीय विधायक तक के निर्देशों को ठेंगा दिखा देने का भी दुस्साहस करने से गुरेज नही करते,
क्यो की लक्ष्मी की कृपा प्राप्त करने के लिए ये जिसका जुगत करते हैं, उसी अस्त्र से सब ठीक कर लेने का विस्वास बनाये रखते हैं।

गत महीने एक फर्म ने एन टी पी सी शक्तिनगर के मुख्य महाप्रवन्धक को पत्र लिख उक्त स्थित से अवगत कराया था।इतना ही नही गत दिनों क्षेत्रीय विधायक के साथ एनटीपीसी प्रवंधन के समच्छ यह बात विधायक ने उठाते हुए पेंडिग मामले शीघ्र निस्तारण करने को कहा था और यू पी एल के रवैये में परिवर्तन लाने का निर्देश दिया था।किंतु इस कम्पनी के ढर्रे और रवैये में कोई परिवर्तन नही आया है।इससे लोगो मे रोष व्याप्त है।

*सांसद और विधायक के साथ “एन टी पी सी” प्रवंधन की होने वाली अगली वैठक में जोरदार ढंग से “यू पी एल” का उठेगा मामला!*

यू पी एल से एन टी पी सी और देश को हो रहे नुकसान और इस कम्पनी में व्याप्त भ्र्ष्टाचार,स्थानीय विस्थापितो को रोजगर न देना,आदि अनेकों मुद्दे को लेकर सांसद और विधायक के समक्ष यू पी एल का मामला स्थानीय विस्थापितो और सम्विदाकारो ने उठाने के लिए तय कर लिया है।

विस्थापितो,स्थानीय संविदाकरो, वेरोजगारो, एवं भाजपा नेताओं ने तय किया है कि सांसद विधायक के माध्यम से एनटीपीसी प्रवंधन और देश के ऊर्जामंत्री से दिल्ली में मिल कर उनके समक्ष पूरा मामला रखते हुए इस कम्पनी को एन टी पी सी से बाहर कर एन टी पी सी को बचाने की मांग करेगा।

*एन टी पी सी को हुए अरबो की आर्थिक क्षति की हो सीबीआई जांच!*

इस कम्पनी के गठन के बाद से अब तक अरबो रुपये का एन टी पी सी को एक अनुमान के अनुसार क्षति हो चुकी है।जिसकी “सीबीआई” से जांच होनी चाहिए और देश की महारत्ना कम्पनी को लूटने से बचाया जाना चाहिए।
*स्थानीय नागरिकों ने एन टी पी सी प्रवंधन और केंद्रीय ऊर्जामंत्री का इस ओर ध्यान आकृष्ट कराया है।*
*क्रमशः इस कम्पनी के भ्र्ष्टाचार को उजागर किया जाता रहेगा,इंतजार कीजिये अगले क़िस्त का:-*

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