हवा में झूूलते हैं यहां मंदिर के खंभे


भारत में ऐसे कई मंदिर है जो कि अपने चमत्कारों और कहानियों के लिए पूरी दुनिया में प्रसिद्ध हैं। आंध्र प्रदेश की अनंतपुर में एक ऐसा ही मंदिर है, जो कि अपने ऐतिहासिक और चमत्कारी महत्व के लिए प्रसिद्ध है। यहां की सबसे खास बात यह हैं कि इस मंदिर के स्तंभ बिना किसी सहारे के हवा में झूल रहे हैं। इसके अलावा इस मंदिर का बहुत संबंध रामायण काल से भी जुड़ा हुआ है। हवा में झूूलते हैं यहां के खंभे, नीचे से कपड़ा निकालने पर होती है मनोकामना पूरी- यह अनूठा मंदिर बैंगलुरु से लगभग100किलोमीटर दूर आंध्रप्रदेश के अनंतपुर जिले के एक लेपाक्षी गांव में है। ऐतिहासिक मत के अनुसार, यह मंदिर16वीं शताब्दी बनवाया गया था। इस मंदिर को लेपाक्षी मंदिर या वीरभद्र मंदिर भी कहते हैं। इस मंदिर की विशेषता ये है कि इस मंदिर के स्तम्भ बिना किसी सहारे के हवा में लटके हुए हैं।यहां के झूलते खंभों को लेकर यह मान्यता प्रचलित है कि इन खंभों के नीचे से अपनी साड़ी या कपड़े निकालने पर मनुष्य की मनोकामना पूरी हो जाती है।


लेपाक्षी गांव के साथ रामायण की एक कथा भी प्रचलित है। कथा के अनुसार, सीता हरण के समय पक्षिराज जटायु ने रावण से युद्ध किया था। उस समय युद्ध में घायल होकर जटायु यहीं गिर थे। जब भगवान राम सीता जी को खोजते हुए यहां पहुंचे तो उन्होंने जटायु से देख कर कहा उठो पक्षी, जिसे तेलुगु ‘ले पक्षी’ कहा जाता है। तभी से इस जगह का नाम लेपाक्षी पड़ गया। मंदिर परिसर के पास ही एक विशाल पैर की आकृति धरती पर अंकित है, जिसे भगवान राम के पैर का निशान मान कर पूजा जाता है।
मंदिर के झूलते खंभे
ब्रिटिश इंजीनियर भी नहीं सुलझा पाया यहां का रहस्य- यह मंदिर अपने झूलते खंभों के रहस्य की वजह से इतना प्रसिद्ध हो गया कि इसका रहस्य जानने के लिए एक ब्रिटिश इंजीनियर तक भारत आया था। इंजीनियर ने बहुत कोशिश की, लेकिन इस चमत्कार का रहस्य जान नहीं पाया और वह भी इस रहस्य को बिना सुलझाए वापिस चला गया।
मंदिर परिसर में स्थापति नंदी की विशाल मूर्ति
यहां पर है नंदी की सबसे विशाल मूर्ति- मंदिर के प्रवेश द्वार पर नंदी की एक विशाल प्रतिमा बनी हुई है। यह एक ही पत्थर से बनी देश की सबसे विशाल मूर्तियों में से एक मानी जाती है। मंदिर की दीवारों पर कई देवी-देवताओं और महाभारत-रामायण की कहानियां अंकित हैं।
लेपाक्षि मंदिर अनंतपुर आंध्र प्रदेश

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