उर्जान्चल की ग्राम पंचायते पार्ट:-5

*उर्जान्चल की ग्राम पंचायते पार्ट:-5*

*सोनभद्र:- म्योरपुर विकास खण्ड के अंतर्गत उर्जान्चल की ग्राम पंचायतों में है ब्यापक भ्र्ष्टाचार-!*

*जाने,ग्राम पंचायत मिसरा के हालात!*
सोनभद्र जिले के विकास खण्ड म्योरपुर के शक्तिनगर से अनपरा तक जिसे उर्जान्चल के रूप में जाना जाता है।
इस क्षेत्र में दो दर्जन से अधिक ग्राम पंचायते है।
इन ग्राम पंचायतों के पास न अपनी भूमि है, नही राज्य सरकार की।
इतना ही नही इन पंचायतों में निवास करने वाले 80% लोगो की अपनी निजी भूमि भी नही है वे भारत सरकार और राज्य सरकारों तथा निजी उद्यगो के द्वारा किसानों से अपने प्रतिष्ठानों के उपयोग के लिए अधिकृत की गई भूमि पर अतिक्रमण कर बस्ती बसा दी गयी है।

इन अतिक्रमण की गई बस्तियों में और कागज पर दो दशक पहले से सरकारी धन का बंदर बाट किया जा रहा है,
जिसमे अरबो का महाघोटाला होना जानकारों के अनुसार बताया जा रहा है।

*एक नजर में मिसरा ग्राम पंचायत!*

मिसरा ग्राम पंचायत की कुल जनसँख्या 1008 एक हजार आठ और मतदाता लगभग 900 नव सौ के करीब है।इस ग्राम पंचायत में मिसरा, भैरवा, योगीचौरा,मर्रक,नकटी,राजस्व गांव आते हैं।इस ग्राम पंचायत के प्रधान राम किशुन कुशवाहा,सचिव काशी ठाकुर और जेई सन्तोष दूबे है। पूर्व प्रधान वृजेश भारती थे। यह ग्राम पंचायत विकास खण्ड की सबसे छोटी ग्राम पंचायत हैं।

*जाने, मिसरा ग्राम पंचायत के हालात!*

ग्राम पंचायत मिसरा के गांवों में घूमने और ग्रामीणों व ग्राम पंचायत के सदस्यों से बात क़रने से हकीकत आईने की तरह खुल कर सामने आजाती है।
पिछले साढ़े चार वर्षों के कार्यकाल में यहा हुवा भृष्टचार खुलकर दिखलाई देता है। ग्राम पंचायत के सदस्य सभी प्रधान से नाराज दिखे और कहा कि साढ़े चार साल में एक भी बैठक प्रधान ने सदस्यों के साथ नही की है।सभी सदस्यों में असंतोष और आक्रोश व्याप्त है। तब सवाल उठता है सभी कामो के प्रस्ताव जो दर्शाए गए होंगे वह फर्जी है,? यानी साढ़े चार वर्ष ग्राम पंचायत की कोई बैठक हुई ही नही तो अधिकारी क्या देख रहे थे? प्रधान की मनमानी पर नियंत्रण क्यो नही लगा आदि अनेकों अनुत्तरित प्रश्न का उत्तर तो सचिव सहित ब्लाक के अधिकारियो को देने ही होंगे?

*सड़क निर्माण में गोल माल!*
ग्राम पंचायत के भैरवा गांव के ऊपर नीचे दोनो टोला में बनी सड़क ग्राम पंचायत के खाते में दर्ज है लेकिन गांव में वह कही भी नजर नही आरही है।

*शौचालय और आवास के हलाता!*

ग्राम पंचायत में लगभग 50 बने आवासों में अधिकांश की हालत घटिया सामग्री इस्तेमाल करने के चलते काफी जर्जर स्थिति में आचुके है। ग्राम मर्रक में राम लाल विश्वकर्मा के दीवाल में दरारें आचुकी है, वह काफी जर्जर स्थिति में है। मकानों के पात्रों से भारी मात्रा में कमीशन खोरी होना भी बताया गया है।
शौचालयों के हालात इतने बदतर है कि एक भी उयोग लायक नही है।लगभग177 सौचालय बन बन चुके हैं जो सब अनुपयोगी बताए गये। अभी 13 निर्माणाधीन है। इन शौचालयों में भी कमीशन खोरी की बात ग्रामीणों ने बताई है।

*मिसरा स्कूल के 6 शौचालयो व एक अतिरिक्त कमरे को बगैर अनुमति तोड़ा गया और खाते में नही जमा हुई फूटी कौड़ी!*

मिसरा ग्राम पंचायत में इस समय एनसीएल द्वारा लगभग 60 लाख की लागत से एक विद्यालय, विद्यालय परिसर में ही निर्माणाधीन है।यह विद्यालय डबल स्टोरी का बनने जा रहा है।
इसी विद्यालय के निर्माण के लिए 6 शौचालयों और एक अतिरिक्त कमरे को डिस्मेंटल कर यह नींव बिल्डिंग बन रही है।
इस सम्बंध में जब इस प्रतिनिधि ने ग्राम प्रधान से पुछा की इसे डिस्मेंटल करने की अनुमति ली गयी थी कि नही तो उन्होंने कहा कि ली गयीं थी,लेकीन यह नही बताया कि किससे ली गयी थी।जब इस प्रतिनिधि ने पूछा कि उसका वेस्ट मटेरियल क्या हुवा तो उन्होंने बताया कि नीलम कर दिया गया।
लेकिन इसकी जानकारी ग्राम पंचायत के किसी सदस्य को नही थी, इससे भी अधिक चौकाने वाला तथ्य यह है बर्तमान ग्राम प्रधान के कार्यकाल में एक भी सदस्यों के साथ बैठक तक नही हुई है।
फिर भी प्रस्ताव पारित होते रहे हैं, इसका मतलब फर्जी हस्ताक्षर से कोरम पंचायत के पूरे किए जाते रहे हैं।
जो जांच का विषय है।

इसी प्रकार 6 शौचालयों से ईटा, लगभग 9000 हजार लगा रहा होगा और एक अतिरिक्त कमरे से लगभग 6 हजार इट लगे होंगे जो डिसमेटल किए गए हैं। इस तरह 15000 हजार ईटा निकला।इसी तरह 6 शौचालय से 6 दरवाजे,और अतिरिक्त कमरे से एक दरवाजा दो खिड़की रहीं होगी।
इस समय एक ईंटे की कीमत 4.50 रुपये है। 15,000इट× 4.50per ईंट =67,500 रुपये का हुवा,10℅ रद्दी निकाल दजिये तो 60,750 रुपये का मटेरियल ग्राम पंचायत के पास होना चाहिए, परन्तु प्रधान जी के ने बताया कि 12 हजार में हमने नीलम कर दिया है।
यह नीलामी सारे नियम कायदे को ताक पर रख की गई है, क्यो की न प्रधान जी ने इसकी जानकारी पंचायत के सदस्यों को दी है? नही ,बैठक की है? और नही अभी तक लगभग6 महीने होने जारहा है फूटी कौड़ी भी ग्राम पंचायत के खाते में जमा है ।
इस तरह लोकतंत्र में प्रधान अपने पंचायत के सदस्यों को दरकिनार कर अपना साढ़े चार साल के कार्यकाल में अपनी मनमानी कर पंचायती राज्य के परिकल्पना को तार तार कर दिया है और इसके बाद भी जारी है ग्रामीणों व पंचायत के सदस्यों के साथ हेकड़ी, जिसकी जांच करा कार्यवाही होनी चाहिए।

*एनसीएल द्वारा निर्माणाधीन विद्यालय का भवन बन रहा है गुड़बत्ताहीन!*

इस विद्यालय में बहुत ही घटिया किस्म का 3 नम्बर का सफेद ईट लगाए जारहे है और लोकल बालू से 10× 1 के मसाला तैयार कर बिल्डिंग की जोड़ाई की जारही है। सरिया मानक के विपरीत लगयीं जारही है और छत के शटरिंग में भी मानक का अनुपालन नही हो रहा है जहाँ 2से3इंच की दूरी पर शटरिंग होनी चाहिए वह 5,6 इंच की दूरी पर हो रही है।जबकि यह क्षेत्र हैवी वलास्टिंग के अंतर्गत आता है, और फिर शिक्षा के मंदिर के छत के निचे देश के भविष्य को बैठना है।उस बिल्डिंग में घटिया सामग्री का इस्तेमाल नही किया जाना चाहिए?,पर हो रहा है?जो एनसीएल के सम्बंधित अधिकारियो के संरक्ष्ण ही हो सकता है, जिसकी जांच कराए जाने की मांग ग्रामीणों ने की है।

*नाली, सफाई,चापाकल, स्कूल पेंटिंग आदि कार्य!*

नाली और सफाई तथा सफाई कर्मी ग्रामीणों के अनुसार कुछ भी काम नही होना ग्रामीणों के अनुसार बताया गया ,पर प्रधान जी ने ठीक इसके उलट सब होना बताया और जमीनी हकीकत तो ग्रामीणों की बातों के अनरूप ही दिखी।

*ग्राम पंचायत सदस्य उपेंद्र पांडेय के अनुसार!*
ग्राम पंचायत के एक्टिव सदस्य उपेन्द्र पांडेय के अनुसार शौचालय, आवास,नाली, शौचालय वगैर ग्राम पंचायत के सदस्यों के अनुमति के तोड़ने ,आदि पर अपना विरोध जताते हुए कहा है कि मिसरा ग्राम पंचायत में 6 सोलर पैनल एनटीपीसी तथा 25-30 एनसीएल कृष्ण शिला के द्वारा लगाए गए हैं।
इनमें उनके अनुसार ग्राम प्रधान ने मिसरा में ही अपने चहेतों के यहा लगवा दिया है। भैरवा गांव में इनके द्वारा कोई विकास कार्य नही किया गया है।
उन्होंने बताया कि हमारे प्रधान की कार्यशैली ऐसी है कि वे ग्राम पंचायत की कभी बैठक नही बुलाये नही अपने कार्यकाल में एक भी काम मे सदस्यों से राय मसबिरा तक करना अपनी तौहीन समझते हैं।
जब सदस्य इनसे किसी चीज की वस्तु स्थिति मांगी जाती है तो वे इसे साझा नही करते हैं। सफाई कर्मियों को किसी ने आज तक देखा तक नही है।
इस पंचायत के हालात यह है कि कार्यकाल खत्म होने के मुहाने पर है परन्तु 11 ग्यारहों वार्डो के सदस्यों का नाम सदस्य खुद नही जानतें।यह पंचायत ग्राम प्रधान की तानाशाही में वनमैन जैसे चली हैं।
ग्राम भैरवा में एक आवास 5 साल बाद भी अधूरा है।
लाभार्थी मर गया उसके खाते में पीस कब? और कितना आया किसी को पता नही? बर्तमान प्रधान यह कह कर पल्ला झाड़ लेते हैं कि यह मेरे कार्य काल का नही है मैं कुछ नही जानता,,,। बहरहाल यह जांच का विषय है जिसकी जांच विभाग को करानी ही चाहिए।

*ग्राम प्रधान की दबंगई!*

ग्राम प्रधान की दबंगई किस कदर है यह अब बताने की आवश्यकता नही रहगयीं जब उनके पंचायत के सदस्य ने उनके साढ़े चार साल के कार्य प्रणाली को विस्तार से बता दिया है।इसमें एक चौकाने वाला पहलू यह है कि कृष्णशिला परियोजना में कुल 13 लोग विस्थापित है, लेकिन चौकाने वाला तत्थ यह है कि यहा कार्यरत आउट सोर्सिंग कम्पनी मेसर्स पिसी पटेल ने 165 विस्थापितो को नॉकरी देने की लिस्ट परियोजना प्रबन्धन को सौपा है उनमें 25 से अधिक मिसरा ग्राम पंचायत के विस्थापित होना प्रधान की सूची के आधार पर कम्पनी में काम कर रहे हैं,लेकिन गांव वालों के अनुसार प्रधान ने एक भी व्यक्ति को नॉकरी नही दिलाया है। यह खेल कही भविष्य में प्रधान जी को जनता की अदालत में महंगा न पड़ जाये?

*देखना है आगे क्या होता हैं?*
भजपा के वरिष्ठ नेता पत्रकार के सी शर्मा ने सूबे के मुख्यमंत्री का

इस ओर ध्यान आकृष्ट कराते हुए ग्राम प्रधान व सचिव के खिलाफ जांच करा कार्यवाही करते हुए सम्बन्धितों से सरकारी धन का नियम विपरीत दुरपयोग करने के कारण इनसे इसकी रिकभरी कराई जाए।

*उर्जान्चल के ग्राम पंचायतों का क्रमशः अब सिलसिलेवार भ्र्ष्टाचार उजागर, परत दर परत आगे किया जाएगया*,
*करिये अगले क़िस्त का इंतजार?*

थिंक मीडिया ब्यूरो रिपोर्ट सोनभद्र
अनूप कुमार साह

रीजनल हेड मिर्जापुर उत्तर प्रदेश

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