सोनभद्र मामले में रिपोर्ट आते ही चला योगी का डंडा, डीएम-एसपी निलंबित, कई अफसरों पर एफआईआर

सोनभद्र मामले में रिपोर्ट आते ही चला योगी का डंडा, डीएम-एसपी निलंबित, कई अफसरों पर एफआईआर*

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोनभद्र जिले के उम्भा गांव में विवादित जमीन को लेकर पिछले महीने हुए सामूहिक कत्लेआम के मामले में जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक को हटाते हुए प्रकरण से जुड़े कई अफसरों और कर्मचारियों पर मुकदमे दर्ज करने के आदेश दिये। मुख्यमंत्री ने यहां प्रेस कांफ्रेंस में बताया कि सोनभद्र मामले में राजस्व विभाग की अपर मुख्य सचिव और वाराणसी जोन के अपर पुलिस महानिदेशक की अध्यक्षता में गठित अलग-अलग समितियों की शनिवार को मिली रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई करते हुए सोनभद्र के जिलाधिकारी अंकित कुमार अग्रवाल और पुलिस अधीक्षक सलमान जफर ताज पाटिल को हटाते हुए उनके खिलाफ विभागीय कार्यवाही शुरू कर दी गयी है। उन्होंने बताया कि इसके साथ ही 17 दिसंबर 1955 को इस जमीन को आदर्श सोसाइटी के नाम गलत तरीके से अंतरित करने का आदेश पारित करने वाले तत्कालीन तहसीलदार कृष्ण मालवीय, अगर जीवित हैं तो उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज करने के आदेश दिये गये हैं। इसके अलावा वर्ष 1989 में वहां के तत्कालीन परगनाधिकारी राबर्टर्सगंज अशोक कुमार श्रीवास्तव और तहसीलदार जयचंद सिंह के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने के आदेश दिये गये हैं। मुख्यमंत्री ने बताया कि सोनभद्र के सहायक अभिलेख अधिकारी राजकुमार को निलंबित करके उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज करने के आदेश दिये गये हैं। इसके अलावा घोरावल के उप-जिलाधिकारी विजय प्रकाश तिवारी के खिलाफ मुकदमा दर्ज होगा। साथ ही पूर्व में निलंबित घोरावल के पुलिस क्षेत्राधिकारी अभिषेक सिंह, उपनिरीक्षक लल्लन प्रसाद यादव, निरीक्षक अरविंद मिश्र और बीट आरक्षी सत्यजीत यादव के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई करते हुए मुकदमा दर्ज करने के निर्देश दिये गये हैं। योगी ने बताया कि साथ ही अदालत के समुचित आदेश के बिना विवादित जमीन को खाली कराने के लिये ग्राम प्रधान यज्ञदत्त भोटिया के पक्ष से एक लाख 42 हजार रुपये जमा कराने पर तत्कालीन अपर पलिस अधीक्षक अरुण कुमार दीक्षित के खिलाफ विभागीय कार्यवाही और मुकदमा दर्ज करने और कृषि सहकारी समितियां वाराणसी के सहायक निबंधक विजय कुमार अग्रवाल को निलंबित करते हुए मुकदमा दर्ज करने के आदेश दिये गये हैं। उन्होंने बताया कि तत्कालीन तहसीलदार राबर्टसगंज द्वारा 17 दिसंबर 1955 को पारित आदेश के बाद उससे संबंधित सभी कार्यवाहियों को अविधिक घोषित करते हुए पूरी जमीन ग्रामसभा में नियमानुसार निर्धारित प्रक्रिया के तहत दर्ज होने के बाद ग्रामीणों को नियमानुसार कृषि कार्य के लिये पट्टे पर दिये जाने के आदेश भी दिये गये हैं। उन्होंने बताया कि इस विवाद की जड़ 10 अक्तूबर 1952 को आदर्श कृषि सहकारी समिति के गठन से पड़ी थी। बिहार से कांग्रेस के तत्कालीन विधान परिषद सदस्य महेश्वर प्रसाद नारायण सिंह और दुर्गा प्रसाद राय ने अपने 12 नातेदारों के साथ मिलकर गठित की थी। सिंह ने वर्ष 1955 में उंभा और सपही गांव में ग्राम पंचायत की 1300 से अधिक बीघा जमीन को इस सोसायटी के नाम पर तहसीलदार मालवीय से साठगांठ करके गलत तरीके से दर्ज कराया था। सोसाइटी से जुड़े लोग सोनभद्र के नहीं, बल्कि बिहार के निवासी थे। मुख्यमंत्री ने कहा कि उस गलत काम के परिणामस्वरूप 1989 में सोसाइटी की जमीन को व्यक्तिगत नामों पर दर्ज किया गया। ये सारे विवाद यहीं से खड़े हुए. इन दोनों गांवों के रहने वाले लोग खासकर अनुसूचित जनजाति से जुड़े लोगों को जब वर्ष 2017 में इस जमीन को बेचे जाने का पता लगा तो विवाद बढ़ गया, जिसका दुष्परिणाम 17 जुलाई 2019 को घोरावल में सपा से जुड़े यज्ञदत्त के हाथों दुर्भाग्यपूर्ण घटना के रूप में सामने आया।

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