खबरो से यूपीएल प्रबंधन में मची खलबली-!

*यूपीएल पार्ट:-3*

*खबरो से यूपीएल प्रबंधन में मची खलबली-!*

*यूपीएल के अधिकारी पता लगाने लगे की, पत्रकार का क्या है, पत्रकारिता में कद, और राजनैतिक हैसीयत-
देश की महारत्ना बिजली कम्पनी एनटीपीसी और रिलायन्स की ज्वाइंट वेंचर यूपीएल के प्रबंधन में उसके सम्बन्ध में इस पत्रकार द्वारा चलाई गई खबरों से खलबली मच गई है।

यूपीएल प्रवंधन अब अपने सहकर्मियों के माध्यम से पत्रकार की राजनैतिक हैसियत और पत्रकारिता में क्या कद है का पता लगाना शुरू कर दिए हैं।
इसी क्रम में आज पत्रकार के एक निकट सहयोगी के सेल फोन पर सम्पर्क कर यूपीएल के एक अधिकारी ने यह जानकारी एकत्रित करने का प्रयास किया था।
जो उनके वौखलाहट का एहसाश कराने के लिए पर्याप्त है, जिससे यह लगता है कि कम्पनी प्रबंधन में हड़कम्प मच गया है।

*यूपीएल प्रबंधन में कैसे होती है नियुक्ति यह भी हैं रहस्यमय!*

लोगो का कहना है की यूपीएल प्रबंधन अपने संस्थान में नियुक्ति कैसे करता है इसके उनके क्या नियम कायदे है ?
यह तो वही जाने?
परन्तु आम आदमी तो इससे अनभिज्ञ ही है।

जिसके परिणाम स्वरूप एनटीपीसी की परियोजनाओं से विस्थापित हुए परिवारों के वेरोजगार युवाओं को इस कम्पनी में रोजगार के अवसर नही मिल पाते हैं,
वही जिन विस्थापितो की जमीन पर एनटीपीसी स्थापित है, उसी एनटीपीसी में यूपीएल संविदाकार की महत्वपूर्ण भूमिका में सेवारत है और इस यूपीएल मे विस्थापितो की कोई पूछ नही है।

जबकि एनटीपीसी के अधिकांश पैकेज इसी कम्पनी को मिलते हैं। जिससे वह प्रति वर्ष करोड़ो रूपये मुनाफा कमाती है।
साथ ही इनको मिलने वाले काम के पैकेजों का भी लाभ ज्यादेतर आउटसाइडर कांट्रेक्टर और वर्कर उठाते हैं,
जिससे एनटीपीसी के विस्थापित परिवार के संविदाकारो व वेरोजगार युवाओं में व्यापक असंतोष और आक्रोश व्याप्त है।

जो कभी भी जनांदोलन में परिवर्तित हो जाये कि सम्भावना से इनकार नही किया जा सकता है।

*क्षेत्रीय सांसद,विधायक और एनटीपीसी प्रबंधन के बीच समय – समय पर होने वाली वैठको में भी उठता रहता है यह मुद्दा!*

वर्षो से यह मुद्दा क्षेत्रीय सांसदों और विधायकों के समक्ष भी यह उठता रहता है,
लेकिन किसी ने इसे आज तक गम्भीरता से नही लिया।
यह तो अभी रहस्यमय बना हुआ है ।
जिससे भी पर्दा यह प्रतिनिधि आगे के किस्तों में हटाते हुए चेहरों पर ढके नकाब को उतार उन्हें भी बेनकाब करेगा।

सिंगरौली परिक्षेत्र के एनटीपीसी की तीनों परियोजनाओं में कार्यरत यूपीएल की कार्यप्रणाली एक जैसी ही है।
यह कम्पनी भले ही एनटीपीसी की जवाईंट वेंचर क्यो न पर यह कई सवालों के घेरे में आके खड़ी हो चुकी है।
क्यो की एनटीपीसी देश के सवा अरब से अधिक लोगो से सरोकार रखने वाली भारत सरकार की एक महारत्ना बिजली कम्पनी है,
जिसके लाभ हानि से भी सभी का सरोकार है।
इस लिए सवाल तो देश का कोई भी नागरिक उठा उसका जबाब तलासेगा ही?

*यूपीएल पर क्यो है एनटीपीसी मेहरबान?*
*क्यो नही आन लाइन टेंडर में कराती है भागीदारी?*

एक तरफ देश मे सरकार फिजूल खर्चे की कटौती में लगी हुई है और सभी तरह के काम आन लाइन विडिंग करा के नियुन्तम दर वाले को ही काम देरही है, जिससे इसमें अधिक से अधिक विडर आते हैं और खुली प्रतिस्पर्धा करते हैं, जिसके चलते पारदर्शित बनी रहती है, वही कोई गड़बड़ी या पचक्ष्पत का आरोप भी नही लगता और सही दर के वजह से देश को बचत भी होती है।

फिर सवाल उठता है कि एनटीपीसी प्रवंधन वगैर खुली विडिंग कराये ज्वाइंट वेंचर की आड़ में यह काम कर देश क्यो क्षति पहुच रही है?
यह तो वही जाने? कि उसके इस नीति से देश और एनटीपीसी को क्या लाभ मिल रहा है?
इस सवाल का जबाब तो उसे देश को देना ही चाहिए?
वगैर विडिंग कराये यूपीएल को काम दिया जाना क्या देश की बर्तमान सरकार के नीतियों के अनरूप है? या नही? इसका जबाब तो देना ही होगा?
दीमक की तरह एनटीपीसी को चाटने वाली यूपीएल का लाभांश क्या देश को मिल रहा है? या किसी निजी ओद्योगिक घराने को ?
यह तो यूपीएल और एनटीपीसी को देश सार्वजनिक करना चाहिए।

*यूपीएल में नही है सीएसआर विभाग क्या?*

जब सरकार ने नीति बनाया है कि हर कम्पनी को अपना सालाना मुनाफा सार्वजनिक करना होगा और उसका 2% सीएसआर फंड में जमा करना होगा और उसका उपयोग उसके नीतियों के अनरूप जन उपयोग में करना होगा ।

क्यो की यह अंश कटने के बाद देश की लोक सम्पत्ति हो जाता है।

इस लोक सम्पत्ति का क्या कोई लेखा जोखा यूपीएल के पास है?
तो उसे सार्वजनिक करना चाहिए?
नही तो क्यो नही है?
क्यो की लोक सम्पत्ति में गड़बड़ी होना एक गम्भीर अपराध है?

एनटीपीसीकेसिंगरौली,विन्ध्यनगर,रिहन्द नगर, से इस कम्पनी ने प्रतिवर्ष कितने रुपये का काम किया? और कितना मुनाफा कमाया? और कितना सीएसआर के मद में जमा किया? और कितना इन परियोजनाओं के आस पास और विस्थापितो के बस्तियों में किस किस किस मद में खर्च किया? यह तो सवाल उठा है तो उसे इसे जनता को बताना ही चाहिए? , क्योंकि सीएसआर का फंड लोक सम्पत्ति होता है।जिसपर आम नागरिक का अधिकार है।
जिससे देश की महारत्ना कम्पनी एनटीपीसी के साख पर बट्टा न लगे?

*देखना है आगे इसमें क्या होता है?*

*आगे के किस्तों में लेके आएंगे कई और चौकाने वाले तथ्य,*

*करिए तब तक इंतजार*,
*शीघ्र मिलेंगे अगली क़िस्त के साथ!*

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