3 मिनट की कार्यवाही और 3 महीने के लिए टल गई अयोध्या की सुनवाई

उत्तर प्रदेशः देश में राम मंदिर निर्माण को लेकर चल रही बहस के बीच सुप्रीम कोर्ट में आज अयोध्या विवाद पर सुनवाई हुई। सोमवार को अयोध्या में राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद पर सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई मात्र 3 मिनट में ही टल गई। चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अगुवाई वाली बेंच ने अब मामले के लिए जनवरी, 2019 की तारीख तय की है।

 

मामला करीब 3 महीने बाद ही कोर्ट में उठेगा। 27 सितंबर को ही कोर्ट ने 29 अक्टूबर की तारीख तय की थी। इससे पहले 27 सितंबर को हुई सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने 1994 के अपने फैसले पर पुनर्विचार से इनकार करते हुए मस्जिद को इस्लाम का आंतरिक हिस्सा मानने से इनकार कर दिया था। मामले की सुनवाई पूर्व चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा, जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस अब्दुल नजीर कर रहे थे।

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2 जजों के बहुमत में लिया फैसला

सुप्रीम कोर्ट ने अपने 1 के मुकाबले 2 जजों के बहुमत फैसले में कहा था कि मामले की सुनवाई सबूतों के आधार पर होगी। हाई कोर्ट की तीन सदस्यीय पीठ ने 30 सितंबर, 2010 को बहुमत वाले फैसले में कहा था कि 2.77 एकड़ जमीन को तीनों पक्षों- सुन्नी वक्फ बोर्ड, निर्मोही अखाड़ा और राम लला में बराबर-बराबर बांट दिया जाए. इस फैसले को किसी भी पक्ष ने नहीं माना और उसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई। बता दें कि, सुप्रीम कोर्ट ने 9 मई 2011 को इलाहाबाद हाई कोर्ट के इस फैसले पर रोक लगा दी थी।

 

वहीं मुस्लिम पक्षकारों की ओर से दलील दी गई थी कि 1994 में इस्माइल फारुकी केस में सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि मस्जिद में नमाज पढ़ना इस्लाम का अभिन्न अंग नहीं है। इस लिहाज से इस फैसले को दोबारा देखने की जरुरत है. यही कारण है कि पहले मामले को संवैधानिक बेंच को भेजा जाना चाहिए। जमीन पर मालिकाना हक किसका है, इसकी लड़ाई 1949 से देश की अदालतों में लड़ी जा रही है।

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