झाड़ियों के पीछे सिसकियां ले रही थी 4 दिन की बच्ची,फरिश्ता बन रफीक ने दी जिंदगी

Newborn baby mureana



Madhya Pradesh: कहते है बेटियां घर की लक्ष्मी होती है। बेटा कितना भी पढ़-लिख ले लेकिन उसका खान-दान बिना किसी लड़की के आगे नहीं बढ़ सकता है। बेटियों की अहमित को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी उन्हें बचाने के लिए कई अभियान शुरू किए हैं।

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लेकिन, आज भी बेटियों को कोख में ही मार दिया जाता है या पैदा होते ही कचरे के ढेर या झाड़ियों में फेंक दिया जाता है। ऐसा ही एक मामला मध्य प्रदेश के मुरैना में सामने आया है। पिछले हफ्ते यहां पर रहने वाले शेख रफीक को झाड़ियों के पीछे एक थैले में एक 4 दिनों की बच्ची फेंकी हुई मिली।

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झाड़ियों के पीछे से आ रही आवाज

रफीक का कहना है कि, उन्हें झाड़ियों के पीछे से किसी बच्चे के रोने की आवाज सुनाई दे रही थी। जब वो वहां गए तो वहां पर उन्हें एक कपड़े का थैला मिला। जब उसे खोल कर देखा तो उनके होश ही उड़ गए। थैले में एक नवजात बच्ची को बांध कर फेंका गया था। जिसके तुरंत बाद उन्होंने एम्बुलेंस को कॉल किया और बच्ची को इलाज के लिए भेजा।

एसएनसीयू में है भर्ती

अब अस्पताल के एसएनसीयू में उस मासूम की सांसों को बरकरार रखने की जिद जारी है। जिस समय रफीक को ये बच्ची मिली वो नदी के किनारे मछलियां पकड़ रहे थे।

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रफीक श्याम बिहार कालोनी में रहते है। रफीक अपने दोस्त निशार खां व सोनू के साथ शौकिया तौर पर मछलियां पकड़ने छौंदा स्थित आसन नदी पर गए थे। नदीं किनारे जब वो अपने दोस्तों के साथ बैठे हुए थे, तो उन्हें किसी बच्चे की हिचकियां सुनाई देने लगी। जब उन्होंने उस आवाज को फॉलो किया तो नदी के ही पास बबूल की झाडिय़ों में एक थैला पड़ा हुआ था जो हिलता हुआ नजर आ रहा था। रफीक ने पास जाकर देखा तो थैले का मुंह रस्सी से कसकर बंधा था। उन्होंने थैले को फाड़ा तो उसमें से जिंद बच्ची निकली।

बच्ची के ब्लड में इन्फेक्शन

बाल कल्याण समिति अध्यक्ष अमित जैन ने इस बच्ची के इलाज के जिम्मेदार ली हुई है। उन्होंने इस बच्ची को प्रार्थना नाम दिया है। इलाज कर रहे डॉक्टरों का कहना है कि, बच्ची का वजन काफी कम है। उसका वजन ढाई किलो होना चाहिए था लेकिन इस वक्त उसका वजन सिर्फ 1.6 किलो ही है। साथ ही उसके ब्लड में भी हल्का सा इन्फेक्शन है।

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