किसानों से गृहमंत्री अमित शाह की अपील सरकार बातचीत के लिए तैयारियां


संतोष तिवारी

नए कृषि बिल का विरोध कर रहे किसानों से अब गृहमंत्री अमित शाहसे अपील की है। गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि सीमा से लेकर दिल्ली-हरियाणा बॉर्डर पर रोड पर अलग-अलग किसान यूनियन की अपील पर आज जो किसान भाई अपना आंदोलन कर रहे हैं, उन सभी से मैं अपील करना चाहता हूं कि भारत सरकार आपसे चर्चा के लिए तैयार है

शाह ने आगे कहा कि 3 दिसंबर को चर्चा के लिए आपको कृषि मंत्री जी ने निमंत्रण पत्र भेजा है। भारत सरकार आपकी हर समस्या और हर मांग पर विचार विमर्श करने के लिए तैयार है। उन्होंने कहा कि अगर किसान चाहते हैं कि भारत सरकार जल्द बात करे, 3 दिसंबर से पहले बात करे, तो मेरा आपको आश्वासन है कि जैसी ही आप निर्धारित स्थान पर स्थानांतरित हो जाते हैं, उसके दूसरे ही दिन भारत सरकार आपकी समस्याओं और मांगों पर बातचीत के लिए तैयार है।

शाह ने किसानों से कहा कि अगर आप रोड की जगह निश्चित किए गए स्थान पर अपना धरणा-प्रदर्शन शांतिपूर्ण ढ़ंग से, लोकतांत्रिक तरीके से करते हैं तो इससे किसानों की भी परेशानी कम होगी और आवाजाही कर रही आम जनता की भी परेशानी कम होगी। शाह ने आगे कहा कि अलग-अलग जगह नेशनल और स्टेट हाइवे पर किसान भाई अपने ट्रैक्टर-ट्रॉली के साथ इतनी ठंड में खुले में बैठे हैं, इन सब से मैं अपील करता हूं कि दिल्ली पुलिस आपको एक बड़े मैदान में स्थानांतरित करने के लिए तैयार है, जहां आपको सुरक्षा व्यवस्था और सुविधाएं मिलेंगी।

केंद्रीय सरकार ने किसानों को बातचीत का ऑफर दे दिया है लेकिन अभी फिलहाल किसानों का गुस्सा नहीं थम रहा है। हरियाणा के जींद से किसानों का दिल्ली की ओर कूच करना शनिवार को भी जारी रहा। शुक्रवार देर शाम से ही पंजाब के किसान दिल्ली की ओर रवाना होने शुरू हो गए थे लेकिन काफी किसान किनाना से लेकर पौली गांव तक बन रहे चार लेन मार्ग पर रूके हुए थे। इसके साथ ही किसानों की मांग है कि वो जंतर-मंतर पर पर ही अनशन करेंगे और सरकार उनको ये इजाजत दे।

दिल्ली के बुराड़ी में निरंकारी समागम ग्राउंड में “शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन

करने की अनुमति दिए जाने के एक दिन बाद प्रदर्शनकारी किसान शनिवार को सिंघू और टिकरी सीमा पर रुके रहे। उन्होंने सरकार से जंतर मंतर पर प्रदर्शन करने की मांग की। पंजाब के सबसे बड़े किसान संघ बीकेयू उग्राहन ने कहा, ‘हम निरंकारी पार्क नहीं जाएंगे और राष्ट्रीय राजधानी के बाहरी इलाके में तब तक बैठेंगे जब तक जंतर मंतर पर विरोध प्रदर्शन करने की अनुमति नहीं दी जाती।’