जानिए, बच्चों के साथ रेप को लेकर क्या कहते हैं दुनिया के ये अलग-अलग कानून

सूरत, कठुआ, उन्नाव, राजकोट या फिर दिल्ली, हर घटना और भी ज्यादा वीभत्स, दर्दनाक और इंसानियत को लहूलुहान करने वाली। इन शर्मनाक घटनाओं के बाद देश उबल रहा है। एक तरफ दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्षा स्वाति मालिवाल बच्चियों के साथ बलात्कार के मामले में 6 माह के भीतर फांसी की सजा चाहती हैं तो वहीं कई राज्यों में बच्चियों के साथ रेप के मामले में फांसी देने का कानून तैयार तो है लेकिन मंजूर नहीं हुआ है।
जाहिर है इन हिंसक, बर्बर और खौफ़नाक घटनाओं के बाद से देश में भी बच्चियों के साथ होने वाले बलात्कार को लेकर कड़ी सजा की मांग तेज हो रही है।

 

आइए जानते हैं कि नाबालिगों के साथ रेप/यौन शोषण के मामलों में किस देश में कितनी सजा का प्रावधान है?

 

भारत- भारत में सिर्फ विरलतम मामले में ही फांसी की सजा हो सकती है। यहां नाबालिगों के साथ बलात्कार के मामले विशेष पाॅक्सो एक्ट के तहत दर्ज किए जाते हैं। इस कानून में बच्चों के साथ बलात्कार के दोषियों के लिए 10 साल से लेकर आजीवन करावास तक की सजा दी जा सकती है। हालांकि, मध्यप्रदेश, राजस्थान और हरियाणा में 12 साल से कम उम्र की बच्चियों के साथ बलात्कार के मामले में फांसी की सजा देने का मसौदा तैयार तो कर लिया है, लेकिन ये अभी भी कानून की शक्ल में नहीं आया है। वहीं पॉक्सो एक्ट में भी बदलावों की बात कही जा रही है।

 

 

मलेशिया- यहां बच्चों के साथ होने वाली यौन हिंसा के लिए सबसे ज्यादा 30 साल की जेल का प्रावधान है।

सिंगापुर – इस देश में चैदह साल के बच्चे के साथ रेप होने पर अपराधी को 20 साल की जेल और जुर्माने की सजा सुनाई जा सकती है।

अमरीका- पहले मौत की सजा का प्रावधान था लेकिन फिलहाल उम्रकैद तक की सजा का प्रावधान है।

फिलीपींस- बच्चों के साथ रेप साबित होने पर बिना पेरोल 40 साल जेल तक की सजा हो सकती है.

आस्ट्रेलिया- यहां बच्चों के साथ रेप के दोषी को 15 से 25 साल तक की जेल हो सकती है.

कनाडा – बच्चों के साथ रेप पर अधिकतम 14 साल तक की जेल की सजा

इंग्लैंड – बच्चों के साथ रेप पर 6 साल से लेकर उम्रकैद तक की सजा

जबकि चीन, नाईजीरिया, पाकिस्तान, ईरान, सऊदी अरब जैसे देशों में बच्चों के साथ बलात्कार पर फांसी की सजा का प्रावधान है।

 

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