बाढ़ में डूब रही थी खुद और रेस्क्यू टीम से कहा-पहले 25 कुत्तों को बचाओ फिर मुझे

kerala women refuse rescue without dog




New Delhi: अक्सर मुश्किल समय में लोग सिर्फ खुद की परवाह करते हैं। यहां तक की खुद को सुरक्षित रखने के लिए वो अपने परिवार वालों तक को भी कई बार पीछे छोड़ जाते हैं। ऐसे हलातों में भला जानवरों के बारे में सोचने के लिए किसके पास समय होगा।

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कुछ साल पहले टेक्सास सिटी में जब बाढ़ आई थी तब देखा गया था कि, वहां के लोगों ने अपने पालतू जानवरों को अकेला छोड़ दिया था। कुछ ऐसी ही स्थिती इन दिनों केरल में भी बनी हुई है। केरल बाढ़ के कहर को झेल रहा है। एक तरफ जहां लोग अपनी जान बचाए फिर रहे है वहीं, इस दौरान एक महिला की दरियादिली भी देखी गई।

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केरल की एक महिला ने खुद को रेस्क्यू कराने के लिए मना कर दिया। उसकी जिद थी कि, जब तक उसके पालतू जानवरों को नहीं बचाया जाएगा तब तक वो भी वहां से कहीं नहीं जाएगी। बाढ़ में फंसी महिलाओं को बचाने गए रेस्क्यू टीम का कहना है कि, उसने उनसे कहा कि, उससे पहले उसके 25 पालतू कुत्तों को बचाया जाए। वो उनके बिना बाढ़ वाले घर को नहीं छोड़ेगी।

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ह्यूमेन सोसाइटी इंटरनेशनल की सैली वर्मा का कहना है कि, जब animal welfare group वहां पर पहुंचा तो उन्होंने देखा की बाढ़ वाले घर में कुत्तों को बिस्तरों से लपेटा गया था। ताकि वो पानी में न डूबे। उन्होंने बताया कि, उन्हें त्रिशूर में बाढ़ वाले घर में फंसी महिला सुनीता के बारे में पता चला। वो जब उसे बचाने गए तो उसने साफ मना कर दिया। सुनीता की जिद थी वो बिना अपने पालतू कुत्तों के बाढ़ वाले इलाके से बाहर नहीं जाएगी। बता दें कि, केरल में बाढ़ की वजह से अब तक 324 लोगों की जाने जा चुकी है।

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इससे भी हैरानी वाली बात है कि, महिला के पास उसका पालतू सिर्फ एक ही कुत्ता है। जबकि, बाकी के कुत्ते सड़कों पर घूमने वाले या फिर जिन्हें जिनके मालिकों ने छोड़ दिए है वो है। शैली ने बताया कि, रेस्क्यू टीम सुनीता की बातों से काफी हैरान थी। क्योंकि, उन्हें ऐसे किसी भी जावनर को बचाने की कोई जानकारी नहीं थी। साथ ही उनके पास उतने जानवरों को बचाने के लिए साधन भी नहीं थे। जिसके बाद रेस्क्यू टीम ने अधिकारियों से मदद मांगी।

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दोबारा जब रेस्क्यू टीम सुनीता के घर पहुंची तब तक उसका आधा से ज्यादा घर पानी में डूब चुका था। जानवर पानी में न डूबे इसका ध्यान रखते हुए सुनीता ने सभी कुत्तों को चादरों से अच्छी तरह से लपेटा हुआ था। बाकी गांव वालों की तरह सुनीता और उसके पति ने राहत शिविर कैंपों में जाने से मना कर दिया था। क्योंकि, वहां इन कुत्तों को लाने से मना कर दिया गया था। शैली ने कहा कि, उन्होंने सुनीता और उसके पालतू कुत्तों के लिए फंडरेजर शुरू किया है। ताकि, बाढ़ खत्म होने के लिए उसके जानवरों के रहने के लिए एक घर बनाया जा सके।

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