5 घंटे तक चली राफेल डील की सुनवाई, SC ने सभी याचिकाओं पर सुरक्षित रखा फैसला

hearing rafale deal

नई दिल्लीः लगभग 5 घंटो तक राफेल लड़ाकू विमान सौदे पर दाखिल की गई याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई की गई। इस सुनवाई के बाद चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली 3 जजों की बेंच ने सभी याचिकाओं पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है।

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सभी पक्षों ने पेश की अपनी-अपनी दलीलें

सुनवाई के दौरान सभी संबंधित पक्षों की तरफ से अपनी-अपनी दलीलें पेश की गईं। इस दौरान कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं और सरकार के साथ-साथ वायुसेना अधिकारियों से भी उनका पक्ष सुना। करीब 5 घंटे लंबी सुनवाई के बाद चीफ जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस एसके कौल और जस्टिस केएम जोसेफ की बेंच ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया।

ऑफसेट गाइडलाइन बदलने पर उठा सवाल

हालांकि राफेल की कीमत को सार्वजनिक करने की मांग कर रहे याचिकाकर्ताओं को उस वक्त बड़ा झटका लगा, जब कोर्ट ने कहा कि जब तक हम खुद सार्वजनिक नहीं करें, तब तक इस पर कोई चर्चा नहीं होगी। चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने सरकार से साल 2015 में ऑफसेट गाइडलाइन बदलने पर सवाल किया। जिस पर सरकार ने कहा कि, ऑफसेट कॉन्ट्रेक्ट मुख्य सौदे के साथ-साथ चलता है। एयर वाइस मार्शल चेलापति ने कहा कि वायुसेना को पांचवीं पीढ़ी के विमानों की जरूरत है, इसलिए राफेल का चयन किया गया।

बता दें कि, सुनवाई के बाद चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने वायुसेना के एयर मार्शल और उप-एयर मार्शल से कहा, कोर्ट में अलग तरह की लड़ाई होती है इसलिए आप जाइए और युद्ध के मैदान में अपना कौशल दिखाइए। पहले याचिकाकर्ताओं की तरफ से दलीलें पेश की गईं, जिसके बाद सरकार की तरफ से पक्ष रखा गया।

डील में हुआ है बदलाव

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील प्रशांत भूषण ने अपनी दलील में कहा- राफेल डील में बदलाव किया गया है। क्योंकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चाहते थे कि, ऑफसेट कॉन्ट्रेक्ट अंबानी की कंपनी को दिया जाए। वहीं, याचिकाकर्ता के वकील एमएल शर्मा की दलील थी की, सरकार की ओर से अदालत में पेश की गई रिपोर्ट से खुलासा होता है कि ये एक गंभीर घोटाला है। उन्होंने इस केस को पांच जजों की बेंच के पास ट्रांसफर करने की भी मांग की।

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