शक्तिनगर परिक्षेत्र के शराब की दुकानों पर बिजली कटौती मात्र दिखावा तो नही

*शक्तिनगर परिक्षेत्र के शराब की दुकानों पर विद्दुत विच्छेदन मात्र दिखावा तो नही-

*यदि बिजली चोरी की जल रही थी, तो फिर चोरी का “एफ आई आर” क्यो नही दर्ज कराई गई-!*

*क्या बिजली चोरी में बिजली विभाग की भूमिका सन्दिग्ध नही प्रतीत होती ? और इनका पत्रकार को धमकी से कनेक्शन नही जुड़ता हैं क्या-?

शक्तिनगर ।सोनभद्र।-जनपद सोनभद्र के उर्जान्चल में विजली व्यवस्था वे पटरी हो चुकी है।

यहा के जे ई और उनके सहयोगी कर्मी आकंठ भ्र्ष्टाचार में डूबे हुये है,और जनता त्रस्त है।

इसी को लेकर इस खबरनवीस द्वारा खबर लिख उच्चाधिकारियों को इस ओर ध्यान आकृष्ट कराने हेतु खबरे चलाई जारही है।

इसी क्रम में विगत सप्ताह शराब की दुकानों पर जल रही “बिजली के मुफ्त खोरी के गठजोड़”, शीर्षक’ से ख़बर चली तो बिजली विभाग और शराब कारोबारी बौखला गए और दूसरे दिन खबरनवीस के सहयोगी के सेल फोन पर लगभग 11 बजे 12 मिनट की गाली गलौज, फर्जी बिल लाखो का भेज मुकदमा लिखाने की धमकी, के साथ भाजपा व भाजपा नेता तथा पत्रकार को गाली देते हुए धमकी दे इलाके में सनसनी फैला दिया है।

धमकी दिलाने वाले शराब कारोबारी व इलाके का जेई वेख़ौफ़ घूम रहे हैं,वही धमकी देने वाला श्रमिक भी उनकी सरपरस्ती में 15 दिन बाद पत्रकार को औकात दिखाने की धमकी देना फिर शुरू कर दिया है।

सूत्र बताते हैं कि इसके पीछे उक्त गठजोड़ है जो अब इतना बौखला गया है कि वे अब पत्रकार को रास्ते से हटाने का ताना बाना बुनना शुरू कर दिये हैं।

*इस क्षेत्र में संचालित शराब की दुकाने25 वर्षो से अधिक समय से चल रही हैं*,
*जिसके बाद जन्मे*
*इस गठजोड़ की जांच कराने की उठने लगी है अब मांग!*

इस क्षेत्र के स्थानीय नेताऔर आम जनता अब कहने लगी है कि इस भ्र्ष्टाचार का खेल दशको पहले खेलना शुरू हुआ जो समाचार लिखने तक जारी है।

इस बीच बिजली विभाग के अधिकारी, कर्मचारी, और शराब कारोबारी आते जाते बदलते रहे हैं ,लेकिन यह मुफ्त खोरी का खेल परम्परागत तरीके से चलता रहा है।

अब सवाल यह उठता हैं?
कि इसकी उच्चस्तरीय जांच कराई जाए और पिछले 25 वर्षों से संचालित होने वाली इन शराब की दुकानों के खिलाफ विजली चोरी का मुकदमा दर्ज करा ,
इस प्रकरण की जांच कराई “”जाए जिसमे करोड़ो का घोटाला हुवा है।

इस दौरान कार्यरत अधिकारियों और जे ई सहित श्रमिको की भी भूमिका की जांच करा, सनलिप्तो के खिलाफ कार्यवाही की जानी चाहिए तथा नुकसान का मूल्यांकन कर रिकवरी की कार्यवाही की जानी चाहिए।

शराब के दुकानों पर की गई कार्यवाही मात्र दिखावे की रही, क्यो की विती रात सभी ठेकों पर बिजली जलती देखी गयी।यह तभी समझ मे आगया था कि वर्षो से वेख़ौफ़, वेधड़क जल रही बिजली जे ई और विजली कर्मियों के सह और संरक्ष्ण के जल ही नही सकती है।
यही गठजोड़ ही है जो पत्रकार को धमकी देने और रास्ते से हटा देने की धमकी का साहस जुटा सका है। जिसका असली सूत्र धार जे ई और उसका मोहरा टी जी 2 है, व आका शराब कारोबारी है।

*बिजली चोरी का fir दर्ज न होना बिजली विभाग की संलिप्तता स्पष्ट है उजागर!*

विजली चोरी के जलाए जाने पर कनेक्शन काटने की कार्यवाही बिजली विभाग द्वारा किया जाना इनके भृष्टाचार की कहानी चिल्ला चिल्ला के वयां कर रही है, फिर भी इनके चाँदी के जूते के सामने सरकार और प्रशासन व विभागीय उच्चधिकारी सब के सब बौने सावित हो रहे हैं।
परन्तु यह कलम का सिपाही भी मौत के पहले अब पीछा नही छोड़ने वाला है।

*चोरी की “एफ आई आर” और रिकभरी की कार्यवाही तो करना ही होगा!*

बिनली चोरी जब सावित हो चुकी है तो क्यो नही जे ई ने रिपोर्ट दर्ज कराई?
क्या रिकभरी की कार्यवाही बिभाग जो अपना जमीर बेच चुका है वह यह कार्यवाही करने का हिम्मत जुटा सकता है क्या?
इस दौरान सेवारत कर्मचारियों को निलंबित कर जांच के बाद कार्यवाही कर सकता है क्या?आदि अनेकों अनुत्तरित सवाल बिजली विभाग के उच्चाधिकरियो के समच्छ खड़ा हो चुका है ,
जिसक जवाब तो सबको चाहिए ही।

अनूप कुमार साह रीजनल हेड

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