अंधेरा था कैसे देखता-59 लोगों को रौंदने वाली ट्रेन के ड्राइवर की सफाई

अमृतसर/दिल्लीः दशहरे के दिन अमृतसर में जो हादसा हुआ ऐसे हादसे की कल्पना किसी ने सपने में भी नहीं की होगी। रावण को जलाने की धुन 59 लोगों की जिंदगियों को रौंद कर निकल गई। अब उनके पीछे उनके परिवार के रोत-बिलखते चेहरे ही रह गए है।

नसीब को कोस रहे

अमृतसर में हुए इस हादसे को लेकर प्रसाशन से लेकर जनता के उपर तक सवाल उठ रहे हैं। वहीं, बिलखते परिवार अपने नसीब को कोस रहे हैं। जिस ट्रेन से ये हदसा हुआ उसके ड्राइवर ने भी इस पर अपनी सफाई दी है। ट्रेन चालक का कहना है कि, “जिस वक्त ट्रेन हादसा हुआ, उस समय जोड़ा फाटक के पास रेल पटरियों पर खड़े होकर लोग रावण दहन देख रहे थे। समय अंधेरा छा चुका था। जैसे ही रावण जलने लगा उससे आस-पास धुआं छा गया और पटाखों की तेज आवाज के कारण लोगों को ट्रेन की आवाज तक नहीं सुनाई दी होगी। वहीं, इतना ज्यादा अंधेरा होने के कारण पटरियों पर कोई खड़ा है ये भी नहीं दिखाई दी।”

रेल ड्राइवर की सफाई

अपनी सफाई में आगे कहते हुए रेल ड्राइवर ने कहा कि, घटनास्थल पर रोशनी की भी व्यवस्था नहीं थी, इसलिए उसे कुछ दिखाई नहीं दिया। इसके अलावा ट्रेन भी घुमावदार मोड़ पर थी। हालांकि, अभी तक ट्रेन चालक की पहचान सार्वजनिक नहीं की गई है। हादसे के बारे में और भी ज्यादा जानकारी लेने के लिए रेल अधिकारी अभी भी उससे पूछताछ कर रहे हैं।

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नवजोत सिंह सिद्धू की पत्नी भी गई थी

दूसरी तरफ रेलवे का कहना है कि, ट्रेन की पटरियों के पास रावण दहन की उन्हें कोई जानकारी नहीं थी। औऱ न ही दहन को लेकर रेलवे से कोई इजाजत मांगी गई थी। वहीं, अमृतसर प्रशासन पर इस हादसे की जिम्मेदारी डाली गई है। वहां के स्थानीय अधिकारियों की माने तो दशहरा कार्यक्रम में नवजोत सिंह सिद्धू की पत्नी भी गई थी। उन्हें इस दहन में बतौर गेस्ट की तरह बुलाया गया था।

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