परितोष पौधशाला मार्ग बनने से लोगो मे खुशी लहर, बरसात में पैदल आना जाना भी रहता था दूभर

 

राम केवल यादव भेटुआ-अमेठी की रिपोर्ट

परितोष पौधशाला पर आने जाने का मात्र इकलौता सम्पर्क मार्ग बनने से लोगो मे जहाँ बहुत खुशी है वही ग्रामीणों ने वन विभाग के कर्मियों को कोटि कोटि आभार प्रकट किया। विदित हो कि विकास खण्ड भेटुआ के परितोष तिराहे पर नेशनल हाईवे 232 के किनारे पर सरकारी पौधशाला स्थापित है। जहां से प्रतिवर्ष लगभग हजारों की संख्या में वृक्षारोपण का कार्य किया जाता है। यहां से आरोपित करने के लिए सरकार के साथ साथ ग्रामीण भी वृक्षारोपण करने के लिए पौधशाला से पौधे लेकर जाते हैं। किन्तु पौधशाला तक जाने के लिए अभी तक सुविधाजनक मार्ग का निर्माण नहीं किया जा सका था। समय समय पर वन विभाग के अधिकारी भी यहां पौधशाला का निरीक्षण करने को आते रहते है। लेकिन रास्ते के मरम्मतीकरण का कार्य प्रारंभ नहीं किया जा सका। बरसात के दिनों में पौधशाला तक जाने के लिए काफी परेशानी का सामना करना पड़ता था। मार्ग इतना खराब था कि पौधे लेकर आना तो उस रास्ते पर नामुमकिन सा लगता था। बरसात के दिनों में रास्ते के गड्ढे पानी से भर जातें हैं। पानी और कीचड से होकर जाने वाले वाहन कभी कभी उसी कीचड में घंटों फंसे रहते हैं। ट्रैक्टर ट्राली के आने जाने से बारिश के मौसम में इस रास्ते पर चलने से लोग घबराने लगते हैं। इसी रास्ते से होकर ग्रामीण क्षेत्रों के बच्चे भी स्कूलो में जाया करते हैं रास्ते में बरसात के दिनों में स्कूली बच्चे बरसात के पानी में फिसलकर गिरते रहते थे। जिससे उनके कपड़े कीचड में गिरने से गन्दे हो जाया करते थे। इस रास्ते को ठीक कराने के लिए कई बार वन विभाग के अधिकारियों को सूचना भी दी गई किन्तु अभी तक कोई ध्यान नहीं दिया गया। अब जाकर वन विभाग के अनुभाग अधिकारी चन्द्र शेखर ओझा और बीट प्रभारी भूपेंद्र कुमार की सक्रियता से इस बहुप्रतीक्षित पौधशाला मार्ग का मरम्मतीकरण का कार्य शुरू किया गया है। मार्ग के मरम्मतीकरण से स्थानीय आमजन ने खुशी जाहिर की है। वही मार्ग के मरम्मतीकरण से पौधरोपण का कार्य आसान हो जाएगा वहीं दूसरी ओर उस रास्ते से आने जाने वाले राहगीरों व ग्रामीणों को भी आवागमन की सुविधा हो गई है। मार्ग के मरम्मतीकरण से राम बहादुर शर्मा,राम मिलन यादव,राम सतन कश्यप, बाबूलाल रैदास,छंगू रैदास राजेश प्रजापति आदि क्षेत्रवासी अनुभाग अधिकारी की प्रशंसा कर रहे हैं।

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