सरकार, अभी मैं जिंदा हूँ, लेकिन हमारे लेखपाल ने हमें मार डाला है

जामो के लेखपाल राधिका प्रसाद का कारनामा

ब्यूरो रिपोर्ट

सरकारी नुमाइंदों के अजबगजब कारनामे सामने आते हैं और शासन प्रशासन कुछ कर नहीं पाता है क्योंकि इन्हीं की आंख के सामने ही कारनामे होते हैं या ये कहा जाए कि अजबगजब कारनामों को करने के लिये इनकी कुछ मजबूरियां होती हैं।

मामला अमेठी के जामो गांव का है जहां के निवासी माताफेर अभी जीवित हैं और चलने फिरने व सोचने समझने की पूरी क्षमता भी है लेकिन हल्का लेखपाल राधिका प्रसाद ने गांव के अन्य लोगो से मिलकर माता फेर को खतौनी खाता संख्या 667 में मृत दिखा दिया और तारीफ ये की माता फेर की जमीन को उनके बच्चों के नाम वरासत न कर गैर बिरादरी के मृतक माता फेर पासी के लड़कों व अन्य के नाम कर दिया जबकि माता फेर से दूर दूर तक उनका कोई संबंध नहीं है। माता फेर नाई जाति से हैं और वरासत पाने वाले पासी जाति के हैं।

मामले की जानकारी के बाद जब माता फेर ने एसडीएम गौरीगंज व डीएम अमेठी के यहाँ फरियाद की तो भी कोई कार्यवाही न हुई। अब पीड़ित अपनी ही जमीन को पाने के लिये अधिकारियों की चौखट पर माथा फोड़ रहा है और अधिकारी हैं कि सुनते ही नहीं।

लेखपाल राधिका प्रसाद का ये कोई पहला कारनामा नहीं है। इस तरह से जिंदा को मुर्दा व मुर्दों को जिंदा करने का खेल एक जमाने से चलता चला आ रहा है।

अभी हालिया ही एक कारनामा जामो के 75 वर्षीय माता प्रसाद पांडेय का भी है जिसे उक्त लेखपाल राधिका प्रसाद ने बड़े कायदे से प्रताड़ित कर रखा है। इस मामले में भी पीड़ित माता प्रसाद पांडेय ने अधिकारियों के यहां खूब एड़ी रगड़ी लेकिन आज तक पीड़ित को न्याय नहीं मिला और न ही लेखपाल राधिका प्रसाद के खिलाफ कोई कार्यवाही हो पाई।

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