भारतीय संस्कृति एवं सभ्यता की सजीव झांकी आज भी सुदूर दक्षिण पूर्व देशों में देखने को मिलती है। डाँ अंगद सिंह

 

भारतीय संस्कृति एवं सभ्यता की सजीव झांकी आज भी सुदूर दक्षिण पूर्व देशों में देखने को मिलती है।निःसंदेह भारतीय संस्कृति का भव्य रूप विश्व मानचित्र पर विभिन्न स्थानों में जीवंत है और हम सभी भारतीयों को इसे अपनी विशिष्टता के साथ बनाए रखने की कोशिश करनी चाहिए।
ये बातें वरिष्ठ पत्रकार एवं साहित्यकार डाँ अंगद सिंह निशीथ ने अमेठी में अपने पत्रकार साथियों के बीच विदेश भ्रमण के अनुभव साझा करते हुए कहा। हाल में ही डॉक्टर अंगत सिंह ने सिंगापुर, वियतनाम, कंबोडिया और थाईलैंड का भ्रमण अपनी धर्मपत्नी आशा सिंह के साथ एक साहित्यिक संस्था के सदस्य के रूप में पूरा किया जहाँ उन्हें 11 वें अंतरराष्ट्रीय हिंदी उत्सव के अवसर पर वियतनाम में स्थित भारतीय वाणिज्य दूतावास के सौजन्य से काव्य पाठ का अवसर मिला तथा लखनऊ की संस्था परिकल्पना द्वारा सम्मानित किया गया। इस यात्रा में परिकल्पना साहित्य संस्था के कुल 57 सदस्य शामिल रहे। डॉक्टर अंगद सिंह ने इन देशों में स्थित विभिन्न मंदिरों एवं ऐतिहासिक स्थलों का भ्रमण एवं दर्शन किया जहां उन्हें लघु भारत का सजीव दर्शन मिला।

अमेठी सेअशोक श्रीवास्तव के  राज कुमार जायसवाल की रिपोर्ट

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