मुक्ति भक्ति की दासी है- डा.राजमणि,

 

बनबीरपुर मे बह रही भक्तिगंगा

अमेठी। संग्रामपुर के बनवीरपुर मे आयोजित श्रीमद्भागवत सप्ताह ज्ञानयज्ञ के अंतर्गत प्रथम दिन व्यास पं डा.राजमणि मिश्र (बालव्यास) ने गोकर्णेपाख्यान धुंधकारी की प्रेत योनि से निवृत्ति, महाऋषि व्यास का असंतोष, नारद चरित्र, अश्वत्थामा द्बारा दौपद्री के पुत्रो का बध, राजा परीक्षित की उनकी मां के गर्भ मे रक्षा, श्रीकृष्ण द्वारा, युधिष्ठिरादि का पितामह के पास जाने का वर्णन विद्वतापूर्ण ढंग से प्रस्तुत कर भक्त श्रोताओं का मन मोह लिया।
बनवीरपुर निवासी कविमंचों के लोकप्रिय कवि एवं वरिष्ठ पत्रकार सुधीर रंजन द्विवेदी के मातापिता राजकुमारी एवं रामलखन द्विवेदी की मुख्य यजमानी मे चल रही श्रीमद्भागवत कथा मे विद्वान कथावाचक डा.राजमणि मिश्र ने राजा परीक्षित की द्विग्विजय तथा कलियुग दमन के वृत्तांत पर प्रकाश डाला।
कथा व्यास ने राजा परीक्षित को श्रृंगीऋषि का श्राप, शुकदेव व राजा परीक्षित के मिलन से कथा का प्रारम्भ किया। विभिन्न पौराणिक प्रसंगों के माध्यम से श्रद्धा एवं भक्ति का महात्म्य बताते हुये कहा कि मुक्ति भक्ति की दासी है। सदैव मुक्ति अपनी बाँहें फैलाकर
भक्ति के स्वागत के लिए तैयार रहती है। सात दिवसीय श्रीमदभागवत कथा मे आचार्य पं. अनिल कुमार दूबे ने वैदिक कर्मकांड संपन्न कराये। आये हुये अतिथियों का स्वागत एवं आभार आयोजक सुनील द्विवेदी ने किया। इस अवसर पर राकेश मिश्र, सुरेश मिश्र, लवलेश दूबे, संतोष दूबे, कमलाकर मिश्र, शिव प्रकाश, भैयाराम और राजू दूबे सहित सैकडों श्रोता उपस्थित रहे।

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