9 मौतें..11 साल, फिर बेदाग हुई मुख्य आरोपी असीमानंद का भगवा रंग, जानें पूरी कहानी

साल 2007 के मक्का मस्जिद विस्फोट से जुड़े मामले में सोमवार को फैसला आया। जिसमें कोई भी सबूत न मिलने और गवाहों के मुकरने से एनआईए की विशेष अदालत ने सभी आरोपियों को बरी कर दिया। इनमें स्वामी असीमानंद का नाम सबसे चर्चे वाला है। बता दें कि, इस साजिश में 9 लोगों की मौत हुई थी।

 

वहीं 11 साल पहले हुई इस घटना में असीमानंद मुख्य आरोपी थे। जांच एजेंसियों ने आरोप पत्र में इस ब्लास्ट में उनकी साजिशकर्त्ता के रूप में भूमिका गढ़ी थी, जिसे अदालत में साबित करने में ये एजेंसियां विफल रहीं।

– असीमानंद का पूरा नाम नभकुमार सरकार है।

– ये मूलत: पश्चिमी बंगाल के हुगली जिले के रहने वाले हैं।

– जांच एजेंसियों के अनुसार वे साल 1995 में कट्टरपंथी नेता के तौर पर पहली बार उभर कर आए।

– इस दौरान उन्होंने हिंदू संगठनों के साथ मिलकर गुजरात में हिंदू धर्म जागरण और शुद्धिकरण अभियान चलाया।

– उन्होंने अपनी गतिविधियां संचालित करने के लिए शबरी माता का मंदिर बनाया।

– इससे पहले वे पुरुलिया में सक्रिय थे।

– जिसके बाद में मध्य प्रदेश, गुजरात और महाराष्ट्र में भी उभरे लगे।

– साल 1990 से 2007 के बीच राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ से जुड़ी संस्था वनवासी कल्याण आश्रम के प्रांत प्रचारक प्रमुख भी रहे थे।

– वहीं जांच में दावा किया था कि, शबरी धाम में असीमानंद ने 2006 में 10 दिन रहकर अजमेर समेत कई स्थानों पर बम ब्लास्ट की साजिश रची थी।

– असीमानंद को अजमेर बम ब्लास्ट समेत विभिन्न मामलों में 19 नवंबर 2010 को हरिद्वार में गिरफ़्तार किया गया था।

– जांच एजेंसियों का दावा था कि साल 2011 में उन्होंने मजिस्ट्रेट को दिए इक़बालिया बयान में अजमेर दरगाह, हैदराबाद की मक्का मस्जिद और अन्य कई स्थानों पर हुए बम विस्फोटों में उनका और अन्य कट्टरवादियों का हाथ होना था। लेकिन कोर्ट में वो खुद अपनी ही बात से मुकर गया।

– कोर्ट में असीमानन्द का बयान आया कि, उसने ऐसा एनआईए के दबाव में आकर कबूला।

– वहीं, पुलिस का कहना है कि वे श्रीकांत पुरोहित के अभिनव भारत और साध्वी प्रज्ञा तथा सुनील जोशी के संगठन वंदे मातरम से भी संबंध रखते है।

– बता दें कि, श्रीकांत मालेगांव में हुए धमाकों के मामले में गिरफ्तार हुए थे।

– इतना ही नहीं, स्वामी असीमानंद पर अजमेर दरगाह समेत विभिन्न स्थानों पर हुए विस्फोटों की योजना बनाने और इस योजना को धरातल पर लाने वालों को पनाह देने का भी आरोप था।

– कहा तो ये भी जाता है कि, मालेगांव की घटना के बाद अभिनव भारत और वंदे मातरम दोनों संगठन की एकजुटता के भी प्रयास करे थे।

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