भारत स्वच्छ मिशन की हकीकत: कागजों में लगभग 1अरब 50 करोड़ रुपये खर्च हुये और कागजों में ही घोषित हुआ अमेठी ओडीएफ, हकीकत कोसों दूर

अमेठी से अशोक श्रीवास्तव की रिपोर्ट

उत्तर प्रदेश के अमेठी में प्रधानमंत्री की महत्वपूर्ण योजना “भारत स्वच्छ मिशन” मतलब घर घर हो शौचालय जिसकी कीमत लगभग डेढ़ अरब अमेठी जिले में आई और पूर्व में रही जिलाधिकारी अमेठी शकुन्तला गौतम ने बिना हकीकत परखे कंगजों में ओडीएफ घोषित कर दिया जबकि शौचालय निर्माण को लेकर जिले के हर गांवों से बहुत सारी शिकायतें धांधली की आयीं लेकिन जिम्मेदारों ने मामले को संज्ञान में नहीं लिया। जब जिम्मेदारों ने मामले को संज्ञान में नहीं लिया या ये कहा जाए कि कुएं में ही भांग पड़ गयी थी तो ग्राम प्रधान व पंचायत कंर्मियों  ने खूब मलाई काटी और और आगे भी मैनेज करने में कोई कसर नहीं छोड़ी इसलिए शिकायत कर्ता अलग थलग पड़ गया।

मजेदार बात तो ये है कि आज भी हर गांव में 50 प्रतिशत ही शौचालय का घटिया तरीके से निर्माण हुआ जिसमें आज भी कोई शौचालय प्रयोज्य नहीं है। किसी शौचालय में दरवाजे नहीं तो किसी मि सीट नहीं तो किसी मे छत नहीं। लाभार्थी उसमे कंडा व अन्य फालतू का सामान रख कर उपयोग में ले रहा है। आज भी पुरुषों, महिलाओं व बच्चों को लोटा व बोतल लेकर शौच के लिये जाते हुए सुबह शाम हर गांव में आराम से देखा जा सकता है।

सरकार ने तरह तरह की बीमारियों से बचाने को लेकर इज्जतघर नाम देकर एक अच्छी पहल की शुरुआत की लेकिन दबंग प्रधान व मनमानी पर उतरे अधिकारियों/ कर्मचारियों के आगे किसी की नहीं चली। इस मामले में डीपीआरओ की भूमिका भी संदिग्ध है कि आखिर बिना जांच पड़ताल किये हुए किस आधार पर जिलाधिकारी को रिपोर्ट प्रेषित किया।

आज अधिकतर ग्राम प्रधान पंचायत चुनाव जीतते कर देखते ही देखते चार पहिया वाहन व अन्य संपत्ति के मालिक बन बैठे जो कल तक साइकिल व मोटर साइकिल से चल रहा था वो प्रधान बनते ही किस खजाने का उपयोग कर वाहनों का मालिक बन बैठा ये जांच का विषय है।

सरकार द्वारा प्रति लाभार्थी 12 हजार रुपये शौचालय निर्माण के लिये पाने का पात्र था लेकिन ग्राम प्रधानों ने अपने चहेते ठेकेदारों से ऐसा शौचालय बनवा दिया कि इज्जतघर न बनकर लूटघर बन गया। आखिर कब होगी इस भ्रष्टाचार की जांच।

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