शनिदेव के इस मंदिर में अपने आप ही रंग बदलते है कलश तो कभी…

कहते हैं कि, न्याय से हर कोई डरता है। और न्याय के देवता शनिदेव के प्रकोप से बचने के लिए भी हर कोई पूरी कोशिश करता हैं क्योंकि, शनिदेव को न्याय का देवता कहा जाता है। शनिदेव के कई किस्से जाने जाते हैं। हालांकि, उनके प्रचीन मंदिर बहुत कम देखें गए हैं। वहीं, उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में एक प्राचीन शनि मंदिर है। जो यहां के खरसाली गांव में स्थित है। पौराणिक कथाओं के अनुसार इस मंदिर को पवित्र नदी यमुना का भाई माना जाता है।

 

कहा जाता है कि, यह स्‍थान पांडवों के समय का है और इसका निर्माण पांडवों ने ही करवाया था। इस पांच मंजिला मंदिर के निर्माण में पत्थर और लकड़ी का उपयोग किया गया है। इसी लिए ये बाढ़ और भूस्‍खलन से सुरक्षित रहता है।
मंदिर में शनिदेव की कांस्य मूर्ति शीर्ष मंजिल पर स्‍थापित है। इस शनि मंदिर में एक अखंड ज्योति भी मौजूद है।

 

चमत्‍कारी कहानियां
कहा जाता है कि, साल में एक बार कार्तिक पूर्णिमा के दिन इस मंदिर में शनि देव के ऊपर रखे घड़े या कलश खुद बदल जाते है। ये कैसे होता है इस बारे में अब तक लोगों को कोई जानकारी नहीं है।

 

ऐसी ही दूसरी कथा है कि मंदिर में दो बड़े फूलदान रखे है, जिनको रिखोला और पिखोला कहा जाता है। ये फूलदान ज़ंजीर से बांध कर रखे जाते हैं। पूर्ण चन्द्रमा के दौरान ये फूलदान नदी की तरफ चलने लगते हैं और बांध के ना रखने पर ये अपने आप ही गायब होने लगते है।