प्रयागराज का वह मंदिर जहां लेटे है हनुमान जी जानिए इस मंदिर का रहस्य


ब्यूरो चीफ प्रयागराज

श्री राम भक्त हनुमान जी का मंदिर देश – दुनिया में बहुत सी जगह है। लेकिन धर्म की नगरी प्रयागराज में संकटमोचन हनुमान जी का एक अनूठा मंदिर है। जिसे बड़े हनुमान जी के नाम से जाना जाता है. ऐसी मान्यता है कि पूरी दुनिया में इकौलाता ऐसा मंदिर जहां हनुमान जी लेटे हुए हैं। और कहा जाता है कि प्रयागराज में आकर अगर हनुमान जी के इस स्वरुप के दर्शन नहीं किया तो पुण्य की प्राप्ति नहीं होती है। यहां दर्शन करने से सारे कष्ट का नाश हो जाता है।

यहां स्थापित हनुमान की अनूठी प्रतिमा को प्रयाग का कोतवाल होने का दर्जा भी हासिल है। आम तौर पर जहां दूसरे मंदिरों मे प्रतिमाएँ सीधी खड़ी होती हैं। वही इस मन्दिर मे लेटे हुए बजरंग बली की पूजा होती है। पौराणिक कथाओं के मुताबिक लंका विजय के बाद भगवान् राम जब संगम स्नान कर भारद्वाज ऋषि से आशीर्वाद लेने प्रयाग आए तो उनके सबसे प्रिया भक्त हनुमान इसी जगह पर शारीरिक कष्ट से पीड़ित होकर मूर्छित हो गए।

पवन पुत्र को मरणासन्न देख माँ जानकी ने इसी जगह पर उन्हे अपना सिन्दूर देकर नया जीवन और हमेशा आरोअग्य व चिरायु रहने का आशीर्वाद देते हुए कहा कि जो भी इस त्रिवेणी तट पर संगम स्नान पर आयेंगा उस को संगम स्नान का असली फल तभी मिलेगा जब वह हनुमान जी के दर्शन करेगा।

हनुमान जी की इस प्रतिमा के बारे मे कहा जाता है कि 1400 इसवी में जब भारत में औरंगजेब का शासन काल था तब उसने इस प्रतिमा को यहां से हटाने का प्रयास किया था। करीब 100 सैनिकों को इस प्रतिमा को यहां स्तिथ किले के पास के मन्दिर से हटाने के काम मे लगा दिया था। कई दिनों तक प्रयास करने के बाद भी प्रतिमा टस से मस न हो सकी। सैनिक गंभीर बिमारी से ग्रस्त हो गये। मज़बूरी में औरंगजेब को प्रतिमा को वहीं छोड़ दिया।