क्यों बढ़ जाता है अक्षय तृतीया पर किए गए दान का महत्व? जानें इसकी मान्यता

वैशाख मास की शुक्ल पक्ष को अक्षय तृतीया का योग माना जाता है। जो इस बार 18 अप्रैल को बना है। इस दिन को बहुत ही षुभ माना जाता है। साथ ही इस दिन हिन्दू धर्म में दान की भी विशेष महत्व बताया गया है। आमतौर पर हिंदू धर्म के मुताबिक उसके किसी भी त्यौहार में दान करना बहुत ही शुभ बताया गया है, लेकिन स दिन किया हुआ दान आपको हजार गुना लाभ दिलाता है।

 

– महाभारत के अनुसार जिस दिन दु:शासन ने द्रौपदी का चीर हरण किया था, उस दिन अक्षय तृतीया तिथि थी। तब भगवान कृष्ण ने द्रौपदी को कभी न खत्म होनेवाली साड़ी वरदान में दी थी।

 

– माना जाता है कि अक्षय तृतीया पर ही युधिष्ठिर को अक्षय पात्र मिला था। इस पात्र की खूबी थी कि इसका भोजन कभी समाप्त नहीं होगा, इसी पात्र की सहायता से युधिष्ठिर अपने राज्य के भूखे और गरीब लोगों को भोजन कराते थे।

 

– जिस दिन सुदामा अपने मित्र भगवान कृष्ण से मिलने गए थे, उस दिन अक्षय तृतीया ही थी। सुदामा के पास कृष्ण को भेंट करने के लिए चावल के 4 दानें ही थे, जिन्हें उन्होंने श्रीकृष्ण के चरणों में अर्पित कर दिया। जिसे देखकर कृष्ण ने उनकी झोंपड़ी को महल बना दिया।

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